गुजरात की आदिवासी परंपराओं की लोरियां, संरक्षण में समर्पित एक शोधकर्ता

Mar 27, 2026

डांग के आदिवासी क्षेत्र से निकलकर 34 वर्षीय जीतेंद्र गावली ने अपनी मां की लोरियों को शोध का विषय बनाते हुए एक अनोखी पहल की है। उन्होंने 150 से अधिक “हलरड़ा” यानी आदिवासी लोरियों का संकलन कर दक्षिण गुजरात की विलुप्त होती मौखिक परंपरा को सहेजा है। चिल्ड्रन्स रिसर्च यूनिवर्सिटी से पीएचडी के दौरान उन्होंने छह जिलों में जाकर कोकना, वसावा, तडवी और गामित समेत नौ जनजातियों की लोरियों को रिकॉर्ड किया, जिनमें कई की कोई लिखित लिपि नहीं है। उनका शोध बताता है कि ये लोरियां बच्चों के भाषा विकास, भावनाओं और सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करती हैं। किसान परिवार से आने वाले जीतेंद्र के लिए यह शोध उनकी मां और दादी को समर्पित एक भावनात्मक विरासत है।