GI टैग मिलने से राजकोट की पटोला साड़ी को मिली वैश्विक पहचान
Jun 30, 2026
राजकोट की प्रसिद्ध पटोला साड़ी को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने से गुजरात की समृद्ध हस्तकरघा परंपरा को नई पहचान मिली है। इस सम्मान ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी प्रतिष्ठा बढ़ाने के साथ-साथ कारीगरों और बुनकर परिवारों का गौरव भी बढ़ाया है। शुद्ध रेशम से पूरी तरह हाथों से बुनी जाने वाली राजकोट पटोला साड़ी पीढ़ियों से चली आ रही उत्कृष्ट बुनाई कला का प्रतीक है और अनेक परिवारों की आजीविका का आधार है। कारीगरों के अनुसार GI टैग से इस शिल्प के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जबकि सरकारी मेलों, प्रदर्शनियों और विपणन सहायता से नए अवसर मिले हैं। यह सम्मान गुजरात की वस्त्र विरासत को संरक्षित करते हुए भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला रहा है।