पिथोरा पेंटिंग को मिला GI टैग, गुजरात के आदिवासी कलाकारों को मिलेगा नया अवसर
Jul 21, 2026
गुजरात के छोटा उदेपुर की राठवा जनजाति की सदियों पुरानी पिथोरा भित्ति चित्रकला को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग के माध्यम से लगातार नई पहचान मिल रही है। यह मान्यता कला की मौलिकता को सुरक्षित रखने, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जनजातीय कलाकारों के लिए नए अवसर सृजित करने में सहायक बन रही है। पारंपरिक लखारा कलाकार पत्तियों, फूलों, खनिजों और महुआ से प्राप्त प्राकृतिक रंगों से इन चित्रों का निर्माण करते हैं, जिनमें प्रकृति, देवताओं और जनजातीय जीवन की झलक दिखाई देती है। कलाकारों के अनुसार यह कला उनकी संस्कृति और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। GI टैग हस्तशिल्प को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने, आजीविका के अवसर बढ़ाने तथा गुजरात की समृद्ध जनजातीय परंपराओं के संरक्षण को और मजबूत कर रहा है।