गुजरात की जसदण पाटरी हस्तशिल्प को मिला GI टैग, कारीगरों के लिए नई उम्मीद
Jul 07, 2026
गुजरात के राजकोट जिले के जसदन की सदियों पुरानी पारंपरिक हस्तकला को बड़ी पहचान मिली है। सागौन की लकड़ी से बनी और बारीक धातु की नक्काशी से सजी जसदन पाटरी को नाबार्ड की ग्राम्य विकास निधि योजना के तहत भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिला है। इस मान्यता से इस पारंपरिक शिल्प को नकली उत्पादों से सुरक्षा मिलेगी और कारीगरों व कारोबारियों के लिए नए बाजारों के अवसर खुलेंगे। समय के साथ कारीगरों ने पारंपरिक पाटरी के अलावा सजावटी सामान, उपहार और धार्मिक वस्तुएं भी बनानी शुरू कर दी हैं। GI टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की मांग बढ़ने लगी है और कारोबार को नई गति मिली है। गुजरात सरकार का कहना है कि GI टैग से इस पारंपरिक उद्योग को और मजबूती मिलेगी। कौशल विकास और अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए युवाओं और महिलाओं को इस क्षेत्र से जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे। GI टैग मिलने से गुजरात की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को नई पहचान मिली है। केंद्र और राज्य सरकार पारंपरिक शिल्प को संरक्षित करने, कारीगरों को प्रोत्साहन देने और उनके उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही हैं।