प्राकृतिक खेती से हल्दी की प्रोसेसिंग तक, गुजरात के किसान बढ़ा रहे हैं अपनी कमाई
Oct 16, 2026
गुजरात में किसान खेती की लागत कम करने और मिट्टी की सेहत बेहतर बनाने के लिए प्राकृतिक खेती अपना रहे हैं। सुरेंद्रनगर जिले के वडोद गांव के 70 वर्षीय कालूभाई पटेल पिछले करीब 13 साल से गाय पर आधारित प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। वह अपने बेटे के साथ 4 एकड़ जमीन पर हल्दी उगाते हैं और इसमें प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल करते हैं। कालूभाई अपनी हल्दी को पाउडर और अचार में बदलकर सीधे ग्राहकों को बेचते हैं। इसके लिए उन्होंने अपने घर पर ही प्रोसेसिंग यूनिट लगाई है, जिसमें स्टीम बॉयलर, पॉलिशिंग मशीन और पाउडर बनाने की मशीन शामिल हैं। इस यूनिट को लगाने में करीब 5 लाख रुपये खर्च हुए, जिसमें बागवानी विभाग ने 2.5 लाख रुपये की सब्सिडी दी। प्राकृतिक खेती और हल्दी की प्रोसेसिंग के क्षेत्र में काम के लिए कालूभाई को तालुका, जिला और राज्य स्तर पर सर्वश्रेष्ठ किसान के पुरस्कार मिल चुके हैं। कृषि विश्वविद्यालयों ने भी उन्हें सम्मानित किया है। उनके बेटे के मुताबिक, लोगों के बीच अच्छी पहचान और सरकारी सहयोग से उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिली है। गुजरात की सरदारकृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में प्राकृतिक खेती के तहत हल्दी की सबसे अधिक पैदावार 40.66 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। वहीं, पारंपरिक खेती में यह पैदावार 19.3 टन प्रति हेक्टेयर रही। प्रोसेसिंग और बाजार तक पहुंच के लिए मिल रहा सरकारी सहयोग किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और आत्मनिर्भर बनने में मदद कर रहा है।